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आदि कवि वाल्मीकि जयंती पर दिखी समाजिक एकता, सभी जातियों ने मनाया जन्मोत्सव

कभी-कभार समाज में इस तरह की खबरें कि दलित समाज ने हिंदू देवी देवताओं का अपमान किया प्राप्त होते है और ऐसी खबरों से ऐसा लगता है कि पूरा दलित समाज ही धर्म की भावना का विरोधी है परंतु सच मे ऐसा नहीं है। इस तरह की घटनाएं अक्सर राजनीति के प्रभाव से देश में फैलाई जाती हैं ताकि देश टुकड़े-टुकड़े होकर बट जाए परंतु दुश्मन लाख कोशिश कर ले उसके बावजूद भी हमारी सामाजिक विचारधारा को सभी समाज के लोग मिल कर धूम धाम से मनाते है।

आज हेली मंडी में बाल्मीकि जयंती बड़े ही धूमधाम से मनाई गई जिसमें सभी देवी देवताओं की झांकी निकाली गई और नाच गाने के साथ उत्सव मनाया गया। राजनीतिक पार्टियां इस तरह के उत्सव को यह साबित करने पर रहती हैं कि यह किसी विशेष जाती समुदाय ने मनाया परंतु जो इस तरह के त्योहारों को नजदीक से देखता है उसे मालूम होता है कि सभी समुदाय जाति के लोगों ने कितना बढ़ चढ़कर इसमें हिस्सा लिया और अंदरूनी तौर पर हम एक दूसरे से कितनी अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं। यही जुड़ाव दुश्मन की भावनाओं को नीचे दिखाने में कामयाब है।
बाल्मीकि जयंती में एक विशेष बात ओर देखने को मिली कि कुछ दिन पहले एक व्यक्ति मुकेश गुप्ता जिस पर sc-st एक्ट लगाया गया था उस व्यक्ति को समाज ने अपनी भावनात्मक आधार पर सही पाया गया और बाल्मीकि मित्र मंडल ने जिसके प्रधान दीपक जी हैं मुकेश गुप्ता को बाल्मीकि जयंती के अवसर पर सम्मानित किया। यह बात साबित करती है कि समाज में कुछ व्यक्ति किसी भी समूह जाति से हो सकते हैं परंतु सभी जाति समुदाय के लोग अपना विवेक रखते हैं और सही को सम्मान देना जानते हैं। अगर बाल्मीकि जयंती सिर्फ बाल्मिको के लिए ही होती तो इसमें मुकेश गुप्ता को सम्मान देना और सभी जाति के लोगों का शामिल होना संभव नहीं था। इस तरह के उत्सव साबित करते हैं हिंदुस्तान एक था एक है और एक रहेगा दुश्मन चाहे कितना भी प्रयत्न कर ले वह हमें अलग करने में कामयाब नहीं होगा

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